उन्नाव की शोधार्थी ने औषधीय पौधों पर शोध कर प्राप्त की पीएच.डी. की उपाधि
लखनऊ, उत्तर प्रदेश | 29 मार्च 2026
उन्नाव जनपद के लिए गर्व का विषय है कि एक युवा शोधार्थी स्वाती सिंह ने से अपना पीएच.डी. विवा सफलतापूर्वक पूर्ण किया। यह उपलब्धि वनस्पति विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान मानी जा रही है।
शोधार्थी ने से एम.एससी. (वनस्पति विज्ञान) की डिग्री प्राप्त की है और वर्तमान में पौध पोषण एवं स्ट्रेस फिजियोलॉजी के क्षेत्र में कार्य कर रही थीं। उनके शोध का मुख्य विषय था — हानिकारक तत्वों का औषधीय पौधों पर प्रभाव एवं जैव रसायनों और केलेट्स के माध्यम से उसका निवारण।
अपने शोध कार्य के दौरान उन्होंने ओसिमम सैंक्टम (तुलसी) तथा कैथरेंथस रोज़ियस (सदाबहार) जैसे महत्वपूर्ण औषधीय पौधों पर विस्तृत अध्ययन किया। इसके साथ ही गेहूं, मक्का, चना, मसूर एवं विग्ना जैसी फसलों पर भी शोध कर पर्यावरणीय तनाव के प्रभावों का विश्लेषण किया।
उनके शोध से यह स्पष्ट हुआ कि प्रदूषण एवं हानिकारक तत्व पौधों की वृद्धि, चयापचय तथा औषधीय गुणों को प्रभावित करते हैं। साथ ही, जैव रसायनों एवं केलेटिंग एजेंट्स के प्रयोग से इन नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है।
हाल ही में सम्पन्न पीएच.डी. विवा में विशेषज्ञों ने उनके शोध कार्य की वैज्ञानिक गुणवत्ता, व्यावहारिक उपयोगिता एवं पर्यावरणीय महत्व की सराहना की।
उन्नाव जिले से संबंध रखने वाली इस शोधार्थी की सफलता ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो उच्च शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं।
उनका शोध भविष्य में टिकाऊ कृषि, औषधीय पौध संरक्षण तथा प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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