प्रश्न: नीचे दिए गए यौगिकों को उनके बढ़ते हुए क्षारीय प्रबलता (basic strength) के क्रम में व्यवस्थित कीजिए:​यौगिक:​(A) साइक्लोहेक्सिलऐमीन (Cyclohexylamine)​(B) ऐनिलीन (Aniline)​(C) p-टॉलुइडीन (p-Toluidine)​

प्रश्न: नीचे दिए गए यौगिकों को उनके बढ़ते हुए क्षारीय प्रबलता (basic strength) के क्रम में व्यवस्थित कीजिए:

यौगिक:

  • (A) साइक्लोहेक्सिलऐमीन (Cyclohexylamine)
  • (B) ऐनिलीन (Aniline)
  • (C) p-टॉलुइडीन (p-Toluidine)

विकल्प:

  1. ​A < B < C
  2. ​C < B < A
  3. ​B < C < A
  4. ​B < A < C
Answer:
  • ऐनिलीन (B): यहाँ बेंजीन रिंग नाइट्रोजन के लोन पेयर को अपनी ओर खींच रही है, जिससे नाइट्रोजन थोड़ा "कमज़ोर" हो जाता है।
  • p-टॉलुइडीन (C): यहाँ बेंजीन रिंग नाइट्रोजन को खींच तो रही है, लेकिन पीछे से -CH_3 समूह रिंग को इलेक्ट्रॉन दे रहा है। इससे नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉनों की कमी उतनी नहीं हो पाती जितनी ऐनिलीन (B) में होती है।
  • साइक्लोहेक्सिलऐमीन (A): यहाँ नाइट्रोजन (N) एक ऐसी रिंग से जुड़ा है जिसमें कोई डबल बॉन्ड नहीं है। नाइट्रोजन के पास जो लोन पेयर (lone pair) है, वह वहीं टिका रहता है। इसलिए, जब कोई प्रोटॉन (H^+) पास आता है, तो नाइट्रोजन उसे आसानी से अपने इलेक्ट्रॉन दान कर देता है।


A (एलिफैटिक) सबसे प्रबल क्षार है क्योंकि उसका लोन पेयर कहीं नहीं घूम रहा।
​C (p-टॉलुइडीन) ऐनिलीन से बेहतर है क्योंकि इसमें इलेक्ट्रॉन देने वाला समूह जुड़ा है।
​B (ऐनिलीन) सबसे कमज़ोर है क्योंकि उसका लोन पेयर रिंग में व्यस्त है और उसे सहारा देने वाला कोई नहीं है।
​अब प्रश्न में दिए गए बढ़ते हुए क्रम (increasing order) को देखें। बढ़ते हुए क्रम का मतलब है: सबसे कमज़ोर, उससे बेहतर, सबसे प्रबल।
​इन संकेतों के आधार पर आपको कौन सा विकल्प सही लगता है?
​(1) A B C
(2) C B A
(3) B C A
(4) B A C

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