*समय के साथ आप जैसे-जैसे ऊंचे प्रशासनिक और शोध संबंधी पदों पर आसीन होते हैं, आपको एक अलग और नए प्रकार की स्किल सेट्स की आवश्यकता होती है:*
उच्च शिक्षा और शोध क्षेत्र में, जब कोई व्यक्ति ऊंचे प्रशासनिक पदों जैसे विभागाध्यक्ष, डीन, प्राचार्य या शोध निदेशक, कुलपति जैसे पद पर आसीन होता है, तो उसके सामने पारंपरिक शिक्षण या प्रयोगशाला-केंद्रित भूमिकाओं से कहीं अधिक जटिल चुनौतियां आ खड़ी होती हैं। यहां केवल विषयगत विशेषज्ञता पर्याप्त नहीं रहती; बल्कि एक नई, बहुआयामी *स्किल सेट* (कौशल संचय) की आवश्यकता पड़ती है, जो नेतृत्व, रणनीतिक सोच, अंतरविषयक सहयोग और डिजिटल परिवर्तन पर आधारित होता है। यह स्किल सेट न केवल संस्थागत लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक होती है, बल्कि प्रादेशिक, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध और प्रशासनिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसकी प्रमुख विशेषताओं, आवश्यकताओं और विकास के तरीकों पर विस्तार से नीचे चर्चा की गई है:
*1. नेतृत्व और टीम प्रबंधन कौशल (Leadership and Team Management Skills)*
ऊंचे पदों पर पहुंचने पर आपको व्यक्तिगत शोध से हटकर टीमों का नेतृत्व करना पड़ता है।
i. *विविध टीमों का प्रबंधन*: विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों, प्रशासनिक कर्मचारियों और छात्रों को एकजुट करना। उदाहरणस्वरूप, एक रिसर्च प्रोजेक्ट में रसायनशास्त्रियों, पर्यावरणविदों और डेटा विश्लेषकों को समन्वयित करना।
ii. *प्रेरणा और संघर्ष समाधान*: टीम सदस्यों को प्रोत्साहित करना और अंतर्विरोधों का त्वरित निपटारा करना। उच्च पदों पर 70% समय टीम प्रबंधन में व्यय होता है, न कि व्यक्तिगत कार्यों में।
iii. *नई आवश्यकता*: भावनात्मक बुद्धिमत्ता (Emotional Intelligence) विकसित करना, जो पारंपरिक शोधकर्ताओं में कम पाई जाती है।
*2. रणनीतिक योजना और नीति निर्माण (Strategic Planning and Policy Making)*
प्रशासनिक भूमिकाओं में दीर्घकालिक दृष्टि आवश्यक है:
i. *ग्रांट राइटिंग और फंडिंग*: ICSSR, ANRF, BIRAC, DST या NABARD जैसी संस्थाओं के लिए योजनाओं के लिए प्रस्ताव तैयार करना। यहां डेटा-आधारित तर्क, बजट प्रबंधन और प्रभाव मूल्यांकन की स्किल्स जरूरी हैं।
ii. *संस्थागत नीतियां*: उच्च शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप पाठ्यक्रम डिजाइन, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDGs) को एकीकृत करना।
iii. *नई स्किल सेट*: SWOT विश्लेषण, परिदृश्य योजना (Scenario Planning) और स्टेकहोल्डर मैपिंग। उदाहरण: गंगा नदी की जल गुणवत्ता पर शोध प्रोजेक्ट के लिए बहु-विभागीय फंडिंग रणनीति।
*3. डिजिटल और तकनीकी साक्षरता (Digital and Technological Literacy)*
आज के युग में शोध प्रशासन डिजिटल होता जा रहा है:
i. *AI और ICT टूल्स*: R, GIS, Chemometrics सॉफ्टवेयर के अलावा AI-आधारित डेटा एनालिसिस और पब्लिकेशन टूल्स (जैसे ORCID, Scopus) का उपयोग।
ii.*ऑनलाइन सहयोग*: Google Workspace, Microsoft Teams के माध्यम से वर्चुअल मीटिंग्स और रिमोट प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग।
iii. *नई आवश्यकता*: साइबर सिक्योरिटी, डेटा प्राइवेसी (GDPR अनुरूप) और ब्लॉकचेन-आधारित रिसर्च डेटा शेयरिंग। पर्यावरण शोध में GIS टूल्स से स्पेशियो-टेम्पोरल एनालिसिस अब अनिवार्य है।
*4. अंतरविषयक और वैश्विक दृष्टिकोण (Interdisciplinary and Global Perspective)*
शोध अब सीमित विषयों तक सीमाबद्ध नहीं:
i. *क्रॉस-डिसिप्लिनरी अप्रोच*: जल गुणवत्ता विश्लेषण में रसायन, पर्यावरण विज्ञान, माइक्रोप्लास्टिक्स और क्लाइमेट चेंज को जोड़ना।
ii. *अंतरराष्ट्रीय सहयोग*: EU या USAID फंडिंग के लिए ग्लोबल पार्टनरशिप्स बनाना।
iii. *नई स्किल*: नेटवर्किंग, क्रॉस-कल्चरल कम्युनिकेशन और इंग्लिश-हिंदी मिश्रित टेक्निकल राइटिंग।
*5. नैतिकता, सस्टेनेबिलिटी और संकट प्रबंधन (Ethics, Sustainability and Crisis Management)*
I. *शोध नैतिकता*: प्लेजरिज्म चेक, IRB अप्रूवल और ओपन एक्सेस पब्लिकेशन।
ii. *सस्टेनेबल प्रैक्टिस*: वाटर-एनर्जी-फूड नेक्सस पर आधारित प्रोजेक्ट्स।
ii. *संकट प्रबंधन*: COVID-19 जैसी महामारी में ऑनलाइन शोध जारी रखना या फंडिंग कटौती का सामना करना।
*इन स्किल सेट्स का विकास करने के कुछ मुख्य तरीके नीचे दिए गए हैं:*
*A. ट्रेनिंग प्रोग्राम*:
IIM या UGC के लीडरशिप कोर्सेस।
*B. मेंटरशिप*:
सीनियर एडमिनिस्ट्रेटर्स से सीखना।
*C. सेल्फ-लर्निंग*: Coursera पर 'Strategic Leadership in Education' जैसे कोर्स।
*D. प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस*:
PACA जैसे संगठनों में सक्रिय भूमिका निभाना।
*निष्कर्षतः* ये नई स्किल सेट्स आपको न केवल पद की मांग पूरी करने में सक्षम बनाती हैं, बल्कि आप जिस संस्था में कोई जिम्मेदारी भरा पद संभालते हैं, आप की लीडरशिप उस संस्था को प्रादेशिक, राष्ट्रीय या वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाती हैं। वर्तमान समय में संस्थानों में उच्च पद पर आसीन और कार्यरत होने पर यह परिवर्तन विशेष रूप से प्रासंगिक है, जहां शोध और प्रशासन में एक्सीलेंस लाने तथा दोनों का संगम आवश्यक है।
*प्रो प्रशान्त सिंह*
*विभागाध्यक्ष,*
*रसायन विज्ञान विभाग*,
*डी. ए. वी. महाविद्यालय, देहरादून*
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